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सोमवार, 18 जनवरी 2021
रविवार, 17 जनवरी 2021
सत्य या झूँठ
सत्य की सुई उठाने का विचार ही माथे पर पसीना ला देता है किन्तु झूँठ के गठ्ठर उठाने में आदमी हिचकता नहीं है। हम यह जानते हुए की पाप कर्म हमें और हमारे धर्म (सञ्चित पूण्य कर्म फल) को हानि पहुंचाएगा फिर भी समय काल परिस्थित वश हम इस पाप कर्म की प्रक्रिया को चालु रखते हैं। कुछ चरित्र ऐसे होते हैं जो कटुता रखते हैं किन्तु बनते मीठे हैं कुछ ऐसे होते हैं जो मौज में रहते हैं उन्हें समझने में भूल होती है, उनको देखते ही हम दूर सरक जाते हैं किन्तु ऐसे लोग काम के होते हैं खरा खरा बोलने वाले ऐसे लोग भले होते हैं। सत्य और झूँठ की भी ऐसी ही कहानी है एक मीठा लगता है बोलने में एक खरी खरी कहता इसलिए उससे हम किनारा करते हैं। झूँठ के तो कई सर होते हैं वो किसी भी जगह से अल्प काल के लिए octopus की तरह आपको बचा सकता है। सत्य निहत्था है उसकी चाल भी पियादे की तरह सीधी है वह झूँठ के घोड़े की तरह टेढ़ी चाल चलना नहीं जानता। सत्य का उपासक सदैव जीवन में दुःख और पीड़ा ही भुगतता है, किन्तु जब न्याय के देवता से साक्षात्कार होगा तो यह सत्य एक सत्य के बदले लाखों झूँठ के फन्दों से लिप्त पापों को काटेगा और वहां यह सत्य संख्या में कम होगा किन्तु इसका प्रतिफल हमें लाखों गुणा अधिक प्राप्त होगा। यहां यह सत्य एक सुखी बासी रोटी के निवाले जैसा प्रतीत हो रहा है किन्तु न्याय के देवता के आगे यह वह राजसी भोजन से भी अनमोल होगा तो फैसला आपको करना होगा, सत्य के साथी बनोगे या झूँठ के व्यापारी .....
~पवन राज सिंह
शनिवार, 16 जनवरी 2021
दिव्यता कैसे प्राप्त हो
आत्मा और परमात्मा के मध्य एक व्यक्ति और है जिसने आत्मा होते हुए परमात्मा से साक्षात्कार किया है, उसे दिव्य आत्मा कहते हैं उस दिव्य आत्मा को एक पुलिया का काम करना आता है और बड़ी सहजता से वह उस कार्य को करता है। आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है। तो यहां आत्मा परमात्मा और दिव्य आत्मा तीन हो गए। दिव्य आत्मा कभी आत्मा था पर वह भी किसी दिव्य आत्मा के सान्निध्य में रहकर दिव्य आत्मा हुआ। यानी शिष्य था जो अब गुरु है और जो अब शिष्य है या शिष्य बनेगा वह बिलकुल सहजता से धीरे धीरे एक दिन गुरु बन जाएगा। यह निरन्तर चलने वाला प्रवाह है।
~पवन राज सिंह
शुक्रवार, 15 जनवरी 2021
शक्ति को मन के समन्दर में न बहायें
आपके शरीर में जो शक्ति प्राण बनके दौड़ रही है। उस शक्ति में जीवन का वृक्ष अपने भीतर से पत्तियां फूल और फल खिला रहा है। इस शक्ति में कुछ और भी गूढ़ शक्तियां हैं जो आपातकाल के समय के लिए इसी शरीर के अंदर कहीं रक्खी हैं इन जीवनदायी शक्तियों का मनुष्य भौतिकता में बहकर ख़ात्मा न कर दे तो ऋषियों ने कहा जीव को चाहिए की इस शक्ति को मन के समन्दर में अकेला न छोड़ें, प्रयास यह रहे की हमें शक्ति का सृजन करना है न की शक्ति को समाप्त करना है। कभी आँख कुछ कहती है कभी नाक कुछ कहता है कभी कान कुछ कहता है सभी रसेंद्रियां अपनी अपनी पूर्ति के लिए इस शक्ति को खत्म कर देंगी। आप शक्ति को सृजनात्मक कार्यों में ही लगायें। मरना तो है ही एक दिन यह जानकर शक्ति को न मारें मन की इच्छा को मारें यानी उस पर भी शने शने काबू पाया जाए।
~पवन राज सिंह
बुधवार, 13 जनवरी 2021
पारस से खुद को रगड़ना होगा
एक आम आदमी सिद्ध योगी सी बातें कैसे कर सकता है। यह विचारों की खुराक रोज वह पहले खाया करता था फिर वर्षों उसने इन सभी विचारों को घोल कर पिया किसी सिद्ध गुरु की शरण में अब उसके अंदर से भी वही जवाब देता है। यह ऐसा है जैसे कुछ लोहे के टुकड़े लो उनमें से किसी भी एक को कुछ महीनों चुम्बक के आलिंगन में या सम्पर्क में रहने दो,फिर उन्हें जब पृथक करोगे तो चुम्बक के गुण कुछ कम मात्रा में सदा के लिए उस लोहे के टुकड़े में आ जाएंगे। जो इसमें इससे पूर्व न थे। बस एक बार किसी पारस पत्थर से खुद को रगड़ना होगा भौतिकता धूल जाएगी आपके दिल दिमाग से दूसरी बार सम्पर्क में आओगे तो आनन्द ही आनन्द... फैसला तुम्हें करना है ढूँढो कोई मीरा कोई नामदेव कोई सूरदास कोई तुकाराम
~पवन राज सिंह
मंगलवार, 12 जनवरी 2021
जरा पलटो देखो क्या छूट गया है
यह हो सकता है जो व्यवस्था आप बनाना चाहते हैं बन जाए जो ऐश्वर्य अनुभव करना चाहते हैं वह भी प्राप्त हो जाए। उसके पश्चात क्या? क्या यह अनुभूति तुम्हें पूर्णता में मिला सकती है। पूर्णता किसी एक तरफ की पुरानी दीवार को ढहा कर नई बनाने से नहीं होगी। यह पूर्णता तो केवल भौतिकता की है किन्तु इसके अलावा भी तीन दीवारें हैं जो फिर नई बनानी होंगी। ये तीन तरफ का काम अभी बाकी है इसके बाद पूर्ण मानव कर्म की गद्दी प्राप्त होगी तुम्हें। तुम्हारे जन्म से अब तक जो कुछ तुम भुला चुके हो जानते बुझते वह सब याद करो उसे सुधारो, वह सत्य हो या कर्म हो या धर्म या सम्बन्ध हो या दान हो या आराधना। आँख तुमने बन्द कर रक्खी हैं जगत में सब कुछ कर सकते हो घुमो जरा पलटो देखो
~पवन राज सिंह
रविवार, 10 जनवरी 2021
अपने अपने चश्मे उतारो
सत्य की रौशनी केवल एक है, परमात्मा सबका एक ही है। साईं बाबा का वचन जो अक्सर बोला करते थे 'सबका मालिक एक'
धार्मिक मानसिकताएं और मान्यताएं सबकी अपनी अपनी हैं। जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश एक है पर धरती पर रहने वालों ने इसको अपने अपने रँगीन चश्मों से देख समझ रक्खा है। गलती इसमें किसी की नहीं जिस वातावरण में जिस स्थान पर जिस भाषा में जिसे जो समझ आ सकता था परमेश्वर ने उसे उसी रूप में ज्ञान को सम्पादित किया। बात टकराव की वहां आई जब एक ने कहा मेरा चश्मा अच्छा है इसका रँग तेरे वाले से अच्छा है। वो रँग और ढंग की बातों पर उलझने लगे। जो कुछ है इस ब्रह्माण्ड में उसका एक रचियता है। आप अपने चश्मों को उतारकर वास्तविक सूर्य के प्रकाश को देखो.
~पवन राज सिंह
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