सत्य की रौशनी केवल एक है, परमात्मा सबका एक ही है। साईं बाबा का वचन जो अक्सर बोला करते थे 'सबका मालिक एक'
धार्मिक मानसिकताएं और मान्यताएं सबकी अपनी अपनी हैं। जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश एक है पर धरती पर रहने वालों ने इसको अपने अपने रँगीन चश्मों से देख समझ रक्खा है। गलती इसमें किसी की नहीं जिस वातावरण में जिस स्थान पर जिस भाषा में जिसे जो समझ आ सकता था परमेश्वर ने उसे उसी रूप में ज्ञान को सम्पादित किया। बात टकराव की वहां आई जब एक ने कहा मेरा चश्मा अच्छा है इसका रँग तेरे वाले से अच्छा है। वो रँग और ढंग की बातों पर उलझने लगे। जो कुछ है इस ब्रह्माण्ड में उसका एक रचियता है। आप अपने चश्मों को उतारकर वास्तविक सूर्य के प्रकाश को देखो.
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