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शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

शक्ति को मन के समन्दर में न बहायें

 आपके शरीर में जो शक्ति प्राण बनके दौड़ रही है। उस शक्ति में जीवन का वृक्ष अपने भीतर से पत्तियां फूल और फल खिला रहा है। इस शक्ति में कुछ और भी गूढ़ शक्तियां हैं जो आपातकाल के समय के लिए इसी शरीर के अंदर कहीं रक्खी हैं इन जीवनदायी शक्तियों का मनुष्य भौतिकता में बहकर ख़ात्मा न कर दे तो ऋषियों ने कहा जीव को चाहिए की इस शक्ति को मन के समन्दर में अकेला न छोड़ें, प्रयास यह रहे की हमें शक्ति का सृजन करना है न की शक्ति को समाप्त करना है। कभी आँख कुछ कहती है कभी नाक कुछ कहता है कभी कान कुछ कहता है सभी रसेंद्रियां अपनी अपनी पूर्ति के लिए इस शक्ति को खत्म कर देंगी। आप शक्ति को सृजनात्मक कार्यों में ही लगायें। मरना तो है ही एक दिन यह जानकर शक्ति को न मारें मन की इच्छा को मारें यानी उस पर भी शने शने काबू पाया जाए।

~पवन राज सिंह

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