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कलाम 19
दर्द-ए-इश्क़ दिल को दुखाता है बहुत विसाल-ए-यार अब याद आता है बहुत ज़ब्त से काम ले अ' रिंद-ए-खराब अब मयखाने में दौर-ए-ज़ाम आता है बहुत साक़ी...
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इश्क़ में दीवानों का ये हाल देखा है बेगानों को होते हम-ख़याल देखा है दीदार-ए-यार में मिलता है वो लुत्फ़ हँसते हुए हर एक परेशान देखा है समझ न आ...
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ऐसे बहुत से शायर हैं, जिनके शेर का दूसरा मिसरा (line) इतना मशहूर हुआ, कि लोग पहले मिसरे (line) को तो भूल ही गये। ऐसे ही, चन्द उदाहरण यहाँ ...
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