यह हो सकता है जो व्यवस्था आप बनाना चाहते हैं बन जाए जो ऐश्वर्य अनुभव करना चाहते हैं वह भी प्राप्त हो जाए। उसके पश्चात क्या? क्या यह अनुभूति तुम्हें पूर्णता में मिला सकती है। पूर्णता किसी एक तरफ की पुरानी दीवार को ढहा कर नई बनाने से नहीं होगी। यह पूर्णता तो केवल भौतिकता की है किन्तु इसके अलावा भी तीन दीवारें हैं जो फिर नई बनानी होंगी। ये तीन तरफ का काम अभी बाकी है इसके बाद पूर्ण मानव कर्म की गद्दी प्राप्त होगी तुम्हें। तुम्हारे जन्म से अब तक जो कुछ तुम भुला चुके हो जानते बुझते वह सब याद करो उसे सुधारो, वह सत्य हो या कर्म हो या धर्म या सम्बन्ध हो या दान हो या आराधना। आँख तुमने बन्द कर रक्खी हैं जगत में सब कुछ कर सकते हो घुमो जरा पलटो देखो
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