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शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

कलाम 17

 ये सितम तो दीवाने पे कम से कम ढा जाईये

जा तो रहे हैं आप कम से कम मुस्कुरा जाइये


उदू से मिलके गले नयी मुहब्बत में हैं गिरफ्तार

पुराने आशिक़ को कम से कम पहचान जाइये


ढूंड लेंगे ये दीवाने फिर से इक हसीन कातिल

मुहब्बत भरे खतों को कम से कम मिटा जाइये


दर्द-ए-इश्क़ मिटाये तो मिट जाएंगे ये दिल जले

ये परवाने की शमआ' कम से कम जला जाइये


हो रहे हैं हमारे इश्क़ के चरचे गरम बाज़ारों में

इस फैलती आग को कम से कम बुझा जाइये


ये राज' न कहना किसी से ये है राज़-ए-इश्क़

दिल-ए-बेताब को कम से कम समझा जाइये

~पवन राज सिंह



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