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शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

कलाम 14

 वाइज़ तुझे फिकर है क्यों सारे जहान की

रिंदों को मिल गयी है दवा हर परेशान की


बेफिक्र हुए जाता है मयखाने से हर कोई 

साक़ी के ज़ाम में है सिफ़त आसमान की


मुहब्बत से मिल रहे हैं रकीबों से भी गले

तारीफ़ क्या करूँ...साक़ी तेरी दूकान की


महफ़िल में तेरी झूमके फिर लोट आते हैं

झुमके अपनी धुन में लोटके,  आ जाते हैं

बातें मीठी लगती हैं बहुत तेरी जबान की


वादे का तेरे एतबार उनको है,   इस कदर

आ गये हैं वो इज्जत गंवा के खानदान की


खोजती हैं यार के दर को रिंदों की टोलियां

खुशबु आती है जहाँ से ज़न्नत के ज़ाम की

 

बात ये राज़ की है तू किसी से न कहना...

खबर न हो जाये सब को यार के मकान की

~पवन राज सिंह

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कलाम 19

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