Watch

सोमवार, 6 जुलाई 2020

नज़र देख रहे हैं


सब लोग, जिधर वो हैं, उधर देख रहे हैं
हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं

कोई तो निकल आएगा सरबाज़े-मुहब्बत
दिल देख रहे हैं, वो जिगर देख रहे हैं

अब ए निगाहे-शौक़ न रह जाए तमन्ना
इस वक्त इधर से वो उधर देख रहे हैं

कब तक है तुम्हारा सुख़न-ए-तल्ख गवारा
इस ज़हर में कितना है असर देख रहे हैं

कुछ देख रहे हैं दिले-बिस्मिल का तड़पना
कुछ गौर से कातिल का हुनर देख रहे हैं

क्यों कुफ़्र है दीदारे-सनम, हजरते-वाइज़
अल्लाह दिखाता है बशर देख रहे हैं

पढ़-पढ़ के वो दम करते हैं कुछ हाथ पर अपने
हंस-हंस के मेरा ज़ख्मे-ज़िगर देख रहे हैं

मैं दाग हूँ मरता हूँ इधर देखिए मुझ को
मुंह फेर कर ये आप किधर देख रहे हैं

~दाग देहलवी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कलाम 19

 दर्द-ए-इश्क़ दिल को दुखाता है बहुत विसाल-ए-यार अब याद आता है बहुत ज़ब्त से काम ले अ' रिंद-ए-खराब अब मयखाने में दौर-ए-ज़ाम आता है बहुत साक़ी...