सब लोग, जिधर वो हैं, उधर देख रहे हैं
हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं
कोई तो निकल आएगा सरबाज़े-मुहब्बत
दिल देख रहे हैं, वो जिगर देख रहे हैं
अब ए निगाहे-शौक़ न रह जाए तमन्ना
इस वक्त इधर से वो उधर देख रहे हैं
कब तक है तुम्हारा सुख़न-ए-तल्ख गवारा
इस ज़हर में कितना है असर देख रहे हैं
कुछ देख रहे हैं दिले-बिस्मिल का तड़पना
कुछ गौर से कातिल का हुनर देख रहे हैं
क्यों कुफ़्र है दीदारे-सनम, हजरते-वाइज़
अल्लाह दिखाता है बशर देख रहे हैं
पढ़-पढ़ के वो दम करते हैं कुछ हाथ पर अपने
हंस-हंस के मेरा ज़ख्मे-ज़िगर देख रहे हैं
मैं दाग हूँ मरता हूँ इधर देखिए मुझ को
मुंह फेर कर ये आप किधर देख रहे हैं
~दाग देहलवी
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