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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022

कलाम 7

 परवाना शमआ का हूँ इश्क़ में दीवाना

आता हूँ बिन बुलाये आशिक़ हूँ पुराना


होती नहीं महफ़िल में चरागों से रौशनी

आता हूँ जमीं पर मैं बनकर के सितारा


कबसे उदास है यूँ साक़ी तेरा मयखाना

आता हूँ मयकदे में लिए अंदाजे-रिंदाना


इश्क़ तो इश्क़ है ये हो जाये किसे भी

आता हूँ मैं तो क्यों परेशान है जमाना


दरख्तों की छाँव में रह लेने दो राही को

आता हूँ सुकून-ए-क़ल्ब को मैं बेचारा


राज़ खुल जाएंगे मेरे गुज़र जाने के बाद

आता हूँ मैं करने को आबाद ये वीराना

~पवन राज सिंह

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