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शनिवार, 11 जुलाई 2020

रूठ के जाना तेरा ~दाग देहलवी

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा

अपने दिल को भी बताऊँ न ठिकाना तेरा
सबने जाना जो पता एक ने जाना तेरा

तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परीशान करती है
किसके उजड़े हुए दिल में ठिकाना तेरा

आरज़ू ही न रही सुब्हे-वतन की मुझको
शामे-गुरबत है अजब वक्त सुहाना तेरा

ये समझ कर तुझे ऐ मौत लगा रखा है
काम आता है बुरे वक्त में आना तेरा

क़ाबा-ओ-दैर में या चश्मे-ओ-दिले-आशिक में
इन्हीं दो-चार घरों में है, ठिकाना तेरा

दाग को यूँ वो मिटाते है और फरमाते हैं
तू बदल डाल हुआ नाम पुराना तेरा

~दाग देहलवी

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