कैफ टोंकी और यावर टोंकी बहुत अच्छे मकबूल शायर हुए हैं टोंक शहर राजस्थान के।
टोंक इक जमाने से नवाबों और शायरों का शहर रहा है। अभी भी आलिम और फाजिल लोग टोंक में रह रहे हैं और ये दौर आगे भी चलता रहेगा। रही बात इन दो शायरों के एक किस्से की
मियाँ यावर टोंकी रास्ते से कहीं जा रहे थे ज़ि बड़ा उदास उदास था तबियत भी जरा नासाज थी देखा सामने से एक दोस्त शायर कैफ टोंकी भी सामने से आ रहे हैं,
नजरें मिली कैफ ने मियाँ असलामु-अलैकुम
यावर टोंकी साहब वालेकुम-असलाम कहकर मुसाफे के लिए हाथ बढ़ा दिया दोनों ने मुसाफा किया और यावर टोंकी साहब ने कहा यार कैफ जरा कुछ सुना दे तबियत बड़ी उदास है आज ज़ि भी नहीं लग रहा तेरे किसी शेर से चेहरे की मायूसी जाती रहे।
हाजिर जवाब कैफ टोंकी साहब ने शेर अर्ज किया; आप भी गौर कीजिए:-
टोंक इक जमाने से नवाबों और शायरों का शहर रहा है। अभी भी आलिम और फाजिल लोग टोंक में रह रहे हैं और ये दौर आगे भी चलता रहेगा। रही बात इन दो शायरों के एक किस्से की
मियाँ यावर टोंकी रास्ते से कहीं जा रहे थे ज़ि बड़ा उदास उदास था तबियत भी जरा नासाज थी देखा सामने से एक दोस्त शायर कैफ टोंकी भी सामने से आ रहे हैं,
नजरें मिली कैफ ने मियाँ असलामु-अलैकुम
यावर टोंकी साहब वालेकुम-असलाम कहकर मुसाफे के लिए हाथ बढ़ा दिया दोनों ने मुसाफा किया और यावर टोंकी साहब ने कहा यार कैफ जरा कुछ सुना दे तबियत बड़ी उदास है आज ज़ि भी नहीं लग रहा तेरे किसी शेर से चेहरे की मायूसी जाती रहे।
हाजिर जवाब कैफ टोंकी साहब ने शेर अर्ज किया; आप भी गौर कीजिए:-
"कैफ के हाथ में छतरी भी है, डण्डा भी है, तलवार भी है,
कैफ खाली ही नहीं है,साहिबे हथियार भी है।"
~कैफ टोंकी
कैफ खाली ही नहीं है,साहिबे हथियार भी है।"
~कैफ टोंकी
"बुजुर्गों से सुना किस्सा
(पवन राज सिंह)"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें